मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

मोक्ष

जितना होना है
उससे अधिक न होना है
इस दुनिया में होते हुए भी 
न होने की तरह जीना है
जो जाति बोधक कर्म है
सिर्फ वही - वही जीना है
नियत से अलग और अधिक
जो भी जिएगा वह कमीना है
इसलिए कहे गए से
अलग होने और जीने की
कभी सोचना ही मत
क्योकि तुम्हारी सारी ऐसी
दुःसाहसपूर्ण इच्छाएं और महत्वाकांक्षाएं
पाप और अवैध होगी
अनवरत् शुद्धि के लिए
समय के देवताओं और इन्द्र के पक्ष मे
तुम्हे जीवनभर निरन्तर
सिर्फ खारिज करते रहना होगा
स्वयं को दूसरों के पक्ष मे !
मोक्ष-रहस्य
जितना होना है
उससे अधिक न होना है
इस दुनिया में होते हुए भी 
न होने की तरह जीना है
जो जाति बोधक कर्म है
सिर्फ वही - वही जीना है
नियत से अलग और अधिक
जो भी जिएगा वह कमीना है
इसलिए कहे गए से
अलग होने और जीने की
कभी सोचना ही मत
क्योकि तुम्हारी सारी ऐसी
दुःसाहसपूर्ण इच्छाएं और महत्वाकांक्षाएं
पाप और अवैध होगी
अनवरत् शुद्धि के लिए
समय के देवताओं और इन्द्र के पक्ष मे
तुम्हे जीवनभर निरन्तर
सिर्फ खारिज करते रहना होगा
स्वयं को दूसरों के पक्ष मे !

एक पौराणिक जिज्ञासा

 ( कवि दिनेश कुशवाह उवाच)


बालि का क्या हुआ?
क्या हुआ बालि का !
उसका सब कुछ लूटने के बाद
उसके हाथ- पैर बांधकर
किसी कुएं मे फेंक आए उसे ?
उसकी उस भोली प्रजा का क्या हुआ
कहा गया जिससे
तुम्हारा राजा
धरती के स्थान पर
पाताल का राजा बना दिया गया है
(कुँए में फेककर )
उसकी हत्या करने के बाद ?